UGC की नई गाइडलाइंस पर रोक की मांग, राष्ट्रपति को भेजा गया ज्ञापन

UGC द्वारा जारी नई गाइडलाइंस को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच चेतन सिंह राजपूत ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर इन पर तत्काल रोक, पुनरीक्षण और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में अकादमिक स्वतंत्रता, प्राकृतिक न्याय और शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

Jan 21, 2026 - 00:09
Jan 21, 2026 - 00:35
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भोपाल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी की गई नई गाइडलाइंस को लेकर देशभर में असंतोष और चिंता का माहौल बनता जा रहा है। इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता एवं विधि विद्यार्थी चेतन सिंह राजपूत ने आज भारत के माननीय राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर इन गाइडलाइंस पर तत्काल रोक लगाने, पुनरीक्षण कराने और संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग की है

ज्ञापन में कहा गया है कि UGC की नई गाइडलाइंस केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं हैं, बल्कि वे संवैधानिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय, अकादमिक स्वतंत्रता और देश के बौद्धिक भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इन नियमों के कारण शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के बीच भय, असुरक्षा और असंतोष का वातावरण बन रहा है

चेतन सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि इन गाइडलाइंस में शिकायत को ही प्राथमिक सत्य मानकर कार्रवाई की संभावना बनाई गई है, जबकि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों — सुनवाई, प्रमाण और निष्पक्षता — पर आधारित है। बिना ठोस साक्ष्य के किसी शिक्षक या छात्र की मंशा तय करना कानून और न्याय दोनों के विरुद्ध है

ज्ञापन में यह भी चिंता जताई गई कि झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों पर किसी प्रकार के स्पष्ट दंडात्मक प्रावधान नहीं हैं, जिससे चयनित उत्पीड़न और वैचारिक दमन का खतरा बढ़ जाता है। इससे विश्वविद्यालय ज्ञान और शोध के केंद्र न रहकर भय और निगरानी के केंद्र बनते जा रहे हैं

उन्होंने मांग की कि

  • UGC की नई गाइडलाइंस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए

  • इन्हें संसदीय या स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के समक्ष पुनरीक्षण हेतु भेजा जाए

  • शिकायत निवारण प्रक्रिया को प्रमाण, सुनवाई और जवाबदेही से जोड़ा जाए

  • झूठी शिकायतों पर सख्त दंड का प्रावधान किया जाए

  • विश्वविद्यालयों की अकादमिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा की जाए 

ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को भी प्रेषित की गई है। चेतन सिंह राजपूत ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था शिक्षा सुधार की बजाय शिक्षा तंत्र में अविश्वास और वैचारिक दमन का कारण बनेगी, जिसका दीर्घकालिक नुकसान पूरे राष्ट्र को होगा

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